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एआई देश की तक़दीर और तस्वीर बदलेंगा : रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ

- पुणे इंस्टीट्यूट ऑफ़ बिज़नेस मैनेजमेंट का 16 वां दीक्षांत समारोह संपन्न

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पुणे:  आज भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया में नंबर 1 बन चुका है. आज देश में चाय बेचने वाले से लेकर बड़े व्यापारी तक डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं. यह केवल सुविधा का बदलाव नहीं, बल्कि एक नई आर्थिक संस्कृति का निर्माण है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी भारत की तस्वीर और तक़दीर बदलने वाला है. यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का द्वार है, यह विचार भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा पुणे इंस्टीट्यूट ऑफ़ बिज़नेस मैनेजमेंट (पीआईबीएम) के 16 वें दीक्षांत समारोह में व्यक्त किए गए.

केंद्रीय जल शक्ती राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी यह विशेष अतिथी के रूप में उपस्थित थे . चॉईस एएमसी के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीष जैन व ग्रॅण्ट थॉर्नटन भारत एलएलपी के भागीदार अंकित चुग, नांदेड के स्वामी रामानंद तीर्थ विद्यापीठ के कुलगुरू डॉ.मनोहर चासकर, मुबिया इंडिया के व्यवस्थापकीय संचालक कवलदीप सिंग, शॉपर्स स्टॉप के व्यवस्थापकीय संचालक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी कवींद्र मिश्रा आदि मान्यवर उपस्थित थे.

दीक्षांत समारोह पीआईबीएम के परिसर में शनिवार 7 मार्च को संपन्न हुआ. इस अवसर पर भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. वहीं मनीष जैन, डिप्टी सीईओ, चॉइस एएमसी प्रा. लि. और अंकित चुघ, ग्रांट थॉमसन भारत एलएलपी अतिथि के रूप में मौजूद थे.

भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने अपने संबोधन में कहा कि यूपीआई के माध्यम से देश में लगभग 40 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन होना इस बात का प्रमाण है कि भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. यह बदलते भारत की तस्वीर है—एक ऐसा भारत जो 2047 के विकसित भारत का सपना देख रहा है.

जब भारत अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारा लक्ष्य होगा विकसित भारत 2047 और उस विकसित भारत के सच्चे ब्रांड एम्बेसडर होंगे हमारे देश के युवा. 2029 तक भारत में लगभग 68 करोड़ लोग ऐसे होंगे जिनकी उम्र 25 वर्ष से कम होगी. कल्पना कीजिए उस ऊर्जा, उस नवाचार और उस प्रेरणा की जो भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी.

उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में भारत मंडपम् में आयोजित एआई समिट भी इसी परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है. अक्सर कहा जाता है कि एआई रोजगार छीन लेगा, लेकिन इतिहास हमें कुछ और सिखाता है. जब कंप्यूटर आया था तब भी यही आशंका जताई गई थी, लेकिन उसी कंप्यूटर ने करोड़ों लोगों को रोजगार, नई तकनीक और नए अवसर दिए. ठीक उसी तरह, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी नए अवसर देगा. आज का भारत बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है और एक नए युग की ओर कदम बढ़ा रहा है. आज एआई युवाओं के लिए अवसरों का नया केंद्र बन चुका है. बीते एक दशक में भारत में लगभग 2.9 लाख नए स्टार्टअप स्थापित हुए हैं. देश के युवा आज ऐसे-ऐसे नवाचार और काम कर रहे हैं, जिनकी कल्पना पहले मुश्किल थी. वर्तमान समय का युवा ऊर्जा, नवाचार और नेतृत्व क्षमता से भरपूर है. यही युवा भारत की असली शक्ति है और यही देश को भविष्य की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा.

इस अवसर पर पीआईबीएम के चेयरमैन रमनप्रीत ने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा रोजगार के अनेक अवसर पैदा कर सकती है और युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ा सकती है. युवा चाहें तो कंपनियों में काम कर सकते हैं या अपना स्वयं का उद्यम भी शुरू कर सकते हैं. पीआईबीएम हमेशा उनके साथ है. कुछ सार्थक करने के लिए स्पष्ट दृष्टि, लक्ष्य के प्रति अनुशासित सोच और मजबूत उद्देश्य की भावना आवश्यक होती है. यदि हम असफलताओं के बावजूद इस मार्ग पर प्रतिबद्ध रहें, तो अंततः अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में जब लाखों छात्र मजबूत कौशल और समान क्षमताओं के साथ स्नातक हो रहे हैं, तब किसी व्यक्ति को अलग पहचान दिलाने वाली चीज़ है—लगातार प्रयास और निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प. जीवन में आगे बढ़ने के लिए स्पष्ट दृष्टि और उद्देश्य होना जरूरी है. यह दृष्टि मजबूत इच्छाशक्ति, अनुशासन और समर्पित मेहनत से समर्थित होनी चाहिए. जब हम इस रास्ते पर चलते हैं, तो यह न केवल हमें सफलता दिलाता है बल्कि समाज के लिए भी सकारात्मक योगदान का माध्यम बनता है.
दीक्षांत समारोह का सूत्र संचालन कौशानी चक्रवर्ती और प्रशांत गुप्ता द्वारा किया गया. साथ ही छात्र-छात्राओं को शपथ परीक्षा विभाग की प्रबंधक हर्षदा शर्मा द्वारा दिलाईं गई. समारोह के दौरान संस्थान के विभिन्न प्रबंधन कार्यक्रमों से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं. इसमें स्वर्ण पदक विजेता व पहले स्थान पर ख़ुशी पांडे रहीं. दीक्षांत समारोह उत्साहपूर्ण संपन्न हुआ.

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