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सारसबाग को ‘शाहीनबाग’ नहीं बनने देंगे;  बकरी ईद से पहले प्रतिबंध की मांग

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पुणे,   पुणे के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले सारसबाग और श्री सिद्धिविनायक मंदिर परिसर को लेकर शहर में विवाद बढ़ता ही जा रहा है, इस स्थल पर किसी भी आपत्तिजनक कार्यवाही न किया जाए, इस संबंध में हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने  जोरदार आंदोलन करते हुए प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, इसके साथ आगामी बकरी ईद के मद्देनज़र सख्त प्रतिबंधात्मक आदेश लागू करने की मांग की।

आंदोलनकारियों का कहना है कि 22 मार्च को रमजान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ इस क्षेत्र में एकत्रित हुई थी, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया—“यह सारसबाग है या शाहीनबाग?”—और कहा कि इस घटना से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

प्रदर्शनकारियों ने “हिंदू राष्ट्र जागृति आंदोलन” के तहत अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखा। प्रमुख मांगों में 22 मार्च की घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की तत्काल जांच और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय, और मंदिर परिसर में गैर-हिंदू सामूहिक कार्यक्रमों पर स्थायी प्रतिबंध शामिल हैं।

इसके अलावा, संगठनों ने 27 मई को होने वाली बकरी ईद के दौरान सारसबाग क्षेत्र में भीड़, मांसाहार या किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधियों को रोकने के लिए पहले से ही प्रतिबंधात्मक आदेश लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित धार्मिक अतिक्रमण का संकेत हो सकता है, जिसे आंतरिक सुरक्षा के नजरिए से गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

इस आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद, पतित पावन संघटना, हिंदु जनजागृती समिति समेत कई संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए।

आंदोलन के अंत में सामूहिक आरती की गई और चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो लोकतांत्रिक तरीके से और उग्र आंदोलन किया जाएगा

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