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कंगना रनौत और टी.जी. मोहनदास के खिलाफ FIR की मांग, पुणे पुलिस को दी गई शिकायत

महिलाओं के सम्मान, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून के राज की रक्षा की मांग - बिटिया फाउंडेशन–गुलाबो गैंग

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पुणे, 5 अगस्त 2026: महिलाओं के सम्मान, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून का राज बनाए रखने की मांग को लेकर बिटिया फाउंडेशन–गुलाबो गैंग की संस्थापक-अध्यक्षा संगीता तिवारी और उपाध्यक्ष शोभा पणीकर ने पुणे शहर पुलिस, परिमंडल-5 की पुलिस उपायुक्त राजलक्ष्मी शिवणकर को दो अलग-अलग लिखित शिकायतें दी हैं। शिकायतों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा अन्य लागू कानूनों के तहत मामला दर्ज कर गहन जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।पहली शिकायत में भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा भारतीय Gen Z युवतियों को लेकर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणियां महिलाओं की प्रतिष्ठा और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली हैं तथा समाज में महिलाओं के प्रति नकारात्मक धारणा को बढ़ावा दे सकती हैं।

दूसरी शिकायत में आरएसएस विचारक और भाजपा के पूर्व इंटेलेक्चुअल सेल के संयोजक के रूप में पहचाने जाने वाले टी.जी. मोहनदास के आधिकारिक YouTube माध्यम पर महिला प्रदर्शनकारियों को लेकर कथित आपत्तिजनक बयान का हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनके बयान में महिलाओं के खिलाफ सामूहिक यौन हिंसा को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई तथा छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाली बात कही गई।

संगीता तिवारी ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इस अधिकार का उपयोग किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने, महिलाओं का अपमान करने या हिंसा को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कानून की नजर में सभी नागरिक समान हैं और शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

बिटिया फाउंडेशन और गुलाबो गैंग की ओर से पुलिस से मांग की गई है कि संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर उनका फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाए। साथ ही संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की लागू धाराओं के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी मांग की कि पूरे मामले की जांच बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के कानून के आधार पर की जाए तथा महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

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