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बच्चे के जन्म के महिलाओं में बढ़ रही पेल्विक फ्लोर की समस्या

डॉक्टरों ने जताई चिंता

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पुणे- बच्चे को जन्म देने के कई साल बाद महिलाओं में पेल्विक फ्लोर से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। हर सप्ताह पुणे में पेल्विक फ्लोर की कमजोरी और पेशाब के रिसाव की समस्या लेकर ३५ से ५० वर्ष की ५-६ महिलाएं इलाज के लिए आती हैं। प्रसव के बाद यह समस्या कई वर्षों तक नजरअंदाज हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार नियमित व्यायाम के कारण यह खतरा कई हद तक कम हो सकता हैं। इसलिए महिलाओं को इस समस्या के बारे में डॉक्टर की सलाह लेना काफी जरूरी हैं।
पेशाब का रिसाव, पेल्विक एरिया में भारीपन या मल को रोकने में परेशानी जैसी समस्याओं को कई महिलाएं उम्र बढ़ने या मां बनने के बाद होने वाली सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, ये सामान्य नहीं हैं। समय पर जांच और इलाज से इन समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है और महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी बेहतर हो सकती है।
गर्भावस्था के दौरान पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियाँ मूत्राशय, गर्भाशय और आंतों को सहारा देती हैं। बढ़ते बच्चे के वजन और प्रसव के दौरान इन मांसपेशियों पर दबाव और खिंचाव पड़ता है। प्रसव के बाद सही व्यायाम और देखभाल न मिलने पर ये मांसपेशियाँ कमजोर हो सकती हैं। समय के साथ इस कमजोरी के कारण पेशाब का रिसाव, पेल्विक क्षेत्र में भारीपन या नीचे की ओर खिंचाव जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। यह समस्या केवल अधिक बच्चों के जन्म से नहीं होती, बल्कि गर्भावस्था और प्रसव के दौरान शरीर पर पड़ने वाले दबाव के कारण एक प्रसव के बाद भी हो सकती है।
गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से पेल्विक फ्लोर या Kegel एक्सरसाइज करना फायदेमंद हो सकता है। प्रसव के बाद भी विशेषज्ञ की सलाह से इन्हें जारी रखना चाहिए। इसके साथ स्वस्थ वजन बनाए रखना, कब्ज से बचना, सक्रिय रहना और भारी वजन उठाने से बचना भी जरूरी है। अगर खांसते, छींकते, हंसते या व्यायाम करते समय पेशाब का रिसाव, बार-बार या अचानक तेज पेशाब लगना, पेल्विक क्षेत्र में भारीपन या योनि में उभार महसूस हो, तो महिलाओं को समय पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
प्रकाशित भारतीय अध्ययनों के अनुसार, लगभग 27–37% महिलाओं को पेशाब पर नियंत्रण न रहने की समस्या हो सकती है। इनमें Stress Incontinence यानी खांसने, छींकने, हंसने या व्यायाम के दौरान पेशाब का रिसाव सबसे आम समस्या है। इसके बावजूद कई महिलाएँ इस बारे में डॉक्टर से बात नहीं करतीं। पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज की जानकारी होने के बावजूद बहुत कम महिलाएँ इसे नियमित रूप से करती हैं। प्रभावित महिलाओं में से केवल लगभग 40% महिलाएँ ही इस समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह लेती हैं।
पुणे स्थित लुल्लानगर मदरहुड अस्पताल की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. पद्मा श्रीवास्तव ने कहा, “महिलाओं को अपने प्रजनन स्वास्थ्य के साथ-साथ पेल्विक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए। प्रसव के बाद पेशाब का रिसाव या पेल्विक क्षेत्र में भारीपन आम हो सकता है, लेकिन इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई महिलाएँ खांसने, छींकने या व्यायाम के दौरान पेशाब की कुछ बूंदों को सहती रहती हैं, जबकि इसका इलाज संभव है। यह समस्या महिला के आत्मविश्वास और रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकती है। मेरी ओपीडी में हर सप्ताह लगभग 5–6 महिलाएँ, जिनकी उम्र 35 से 50 वर्ष के बीच होती है, प्रसव के बाद पेशाब के रिसाव की समस्या के लिए मदद लेने आती हैं। समय पर जांच, पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज, फिजियोथेरेपी, जीवनशैली में बदलाव और उचित उपचार से अधिकांश महिलाओं में काफी सुधार हो सकता है।”
डॉक्टरों के अनुसार, सी-सेक्शन से पेशाब के रिसाव की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। गर्भावस्था के दौरान पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर पड़ने वाला लगातार दबाव भी इसकी एक वजह हो सकता है। इसलिए सी-सेक्शन के बाद भी कुछ महिलाओं में यह समस्या हो सकती है।
डॉ. पद्मा श्रीवास्तव ने आगे कहा, “पेशाब का रिसाव, पेल्विक क्षेत्र में भारीपन या योनि में उभार जैसी समस्या होने पर महिलाओं को शर्म नहीं करनी चाहिए। समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सही तरीके से पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि गलत तकनीक से फायदा कम हो सकता है। अगर समस्या बार-बार हो रही है, तो जल्द जांच करवानी चाहिए। समय पर इलाज से समस्या को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिल सकती है।”

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