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भारतीय संस्कृति का संरक्षण समय की आवश्यकता _आदिनाथ मंगेशकर

पुणे में ‘हेरिटेज यात्रा–2026’ का भव्य शुभारंभ

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पुणे : भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन, समृद्ध तथा विविधता में एकता का प्रतीक है। वसुधैव कुटुम्बकम् की उदात्त भावना, शांति, सहिष्णुता, सम्मान और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित जीवनशैली भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ हैं। अतः पाश्चात्य संस्कृति को समझते हुए अपनी भारतीय संस्कृति का संरक्षण करना आज समय की आवश्यकता है। इस दिशा में ‘हेरिटेज यात्रा’ जैसे उपक्रम अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। इस महोत्सव में पारंपरिक हस्तकला से लेकर ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) जैसी आधुनिक तकनीकों तक की यात्रा का अनुभव किया जा सकता है। पुणे महानगरपालिका तथा एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह पहल सराहनीय है, ऐसा मत प्रसिद्ध संगीतज्ञ आदिनाथ मंगेशकर ने व्यक्त किया।

वे भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से पुणे महानगरपालिका तथा एमआईटी आर्ट, डिज़ाइन एंड टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय (एडीटी) के संयुक्त तत्वावधान में सिंहगढ़ रोड स्थित पु. ल. देशपांडे कलाग्राम में आयोजित ‘हेरिटेज यात्रा–2026’ महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।

इस अवसर पर फिल्म्स विभाग एवं दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक मुकेश शर्मा, पुणे महानगरपालिका के सांस्कृतिक विभाग के प्रशासनिक अधिकारी राजेश कामठे, एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय की कार्यकारी निदेशक ज्योति ढाकणे-कराड, कुलपति डॉ. राजेश एस., प्रति-कुलपति डॉ. नचिकेत ठाकुर, महोत्सव की संयोजक डॉ. अश्विनी पेठे, डॉ. अतुल पाटिल सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेश एस. ने भविष्य की चुनौतियों का सामना करते समय अपनी विरासत और संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कृति की जड़ों की ओर पुनः लौटना तथा युवा पीढ़ी में जिज्ञासु प्रवृत्ति विकसित करना समय की मांग है। भविष्य की ओर अग्रसर होते हुए संस्कृति की नींव मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है, ऐसा भी उन्होंने उल्लेख किया।

 

पुणे महानगरपालिका के सांस्कृतिक विभाग के प्रशासनिक अधिकारी राजेश कामठे ने एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय की इस पहल तथा महानगरपालिका के साथ हुए सहयोग की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘हेरिटेज यात्रा’ आगामी काल में और अधिक व्यापक तथा भव्य स्वरूप धारण करेगी। सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध पुणे शहर में ऐसे नवाचारी उपक्रमों को पुणे महानगरपालिका एवं कलाग्राम केंद्र सदैव पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा, यह आश्वासन भी उन्होंने दिया।

एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय की कार्यकारी निदेशक श्रीमती ज्योति ढाकणे-कराड ने कहा कि कला भारतीय जीवन-पद्धति का अभिन्न अंग है। उन्होंने वैश्वीकरण के युग में भी परंपराओं को न भूलने का आह्वान किया। साथ ही विद्यार्थियों से कला क्षेत्र को करियर के रूप में अपनाने तथा अपने कौशल का उपयोग देश की प्रगति हेतु करने का आग्रह किया।

उद्घाटन के पहले ही दिन विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने पारंपरिक ईंट-निर्माण, इमर्सिव हेरिटेज, मृत्तिका कला (पॉटरी), नाट्य कार्यशाला, गोंड पेंटिंग, श्लोक पाठ, वारली चित्रकला एवं सामूहिक बुनाई जैसे उपक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। 7 फरवरी तक चलने वाले इस निःशुल्क महोत्सव में पुणेवासियों से बड़ी संख्या में सहभागिता करने का आयोजकों ने आह्वान किया है।

शनिवारवाड़ा से ‘हेरिटेज वॉक’ का आयोजन

महोत्सव के आकर्षण ‘हेरिटेज प्लेलैंड’ में विद्यार्थियों सहित नागरिकों को विभिन्न खेलों के माध्यम से इतिहास की यात्रा कराई जा रही है। उद्घाटन के दिन शैक्षणिक विशेषज्ञों द्वारा तैयार इन खेलों में विद्यार्थियों ने उत्साह से भाग लिया। ‘महामिस्ट्री’, ‘डार्ट एंड डिस्कवर’, ‘अराउंड इंडिया’ तथा ‘मिस्ट्री बॉक्स पज़ल’ जैसे खेल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। विशेष रूप से ‘महाराष्ट्र के लिए स्वयं की मुद्रा की रचना’ उपक्रम में विद्यार्थियों ने रचनात्मकता का परिचय देते हुए महाराष्ट्र की अस्मिता दर्शाने वाली मुद्राएँ डिज़ाइन कीं। महोत्सव के अंतर्गत 6 एवं 7 फरवरी को प्रातः 8.00 बजे शनिवारवाड़ा से ‘हेरिटेज वॉक’ का आयोजन किया गया है।

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