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85% किडनी डैमेज और इच्छामृत्यु की सलाह के बावजूद, पुणे के डॉक्टर ने जर्मन शेफर्ड को बचाया

५ साल के एक जर्मन शेफर्ड कुत्ते को बहुत गंभीर हालत में पुणे के द स्मॉल एनिमल क्लिनिक में लाया गया। उसकी किडनी लगभग काम करना बंद कर चुकी थी और पहले डॉक्टरों ने उसे इच्छामृत्यु देने की सलाह दी थी। लेकिन समय पर किए गए हेमोडायलिसिस से उसे नई जिंदगी मिली हैं। इसके कारण बच्ची की जान भी बची और किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत भी नही पडी।
पुणे – किडनी की बिमारी सिर्फ इंसानों में नही बल्कि अब कुत्तों में भी दिखाई दे रही हैं। पुणे में एक ५ साल के कुत्ते को गंभीर किडनी की बिमारी हुई थी। समय रहते इलाज नही मिलता तो उसकी जान जा सकती थी। लेकिन पुणे के द स्मॉल एनिमय क्लिनिक के वेटरनरी सर्जन डॉ. नरेंद्र परदेशी ने शेल्बी नाम के एक जर्मन शेफर्ड को नई जिंदगी दी हैं। शेल्बी गंभीर किडनी फेल्योर से पीड़ित था। पहले इलाज का कोई असर नहीं हुआ और उसे इच्छामृत्यु देने की सलाह दी गई थी। लेकिन बाद में हेमोडायलिसिस और लगातार देखभाल से उसकी हालत में सुधार हुआ और उसे फिर से जीने का मौका मिला।
बेलगावी के डोड्डनावर परिवार का पालतू कुत्ता शेल्बी पहले बहुत चंचल और खुश रहता था। वह हमेशा खेलता था और अपने परिवार के साथ रहता था। लेकिन धीरे-धीरे उसकी तबीयत खराब होने लगी। वह कमजोर हो गया और उसने खाना-पीना भी कम कर दिया। उसे उल्टी होने लगी, वह सुस्त रहने लगा और उसे पहले जैसी चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं रही। इसकी बिघडती सेहत को देखकर परिवार में काफी चिंता का माहौल था। १५ मार्च से उसका इलाज बेंगलुरु में चल रहा था। उसे १५ दिनों उसका अस्पताल में इलाज शुरू था लेकिन उसकी सेहत में सुधार नही हुआ। ३१मार्च तक उसकी हालत और ज्यादा खराब हो गई और डॉक्टरों ने उसे इच्छामृत्यु देने की सलाह दी।
लेकिन कुत्ते के मालिक ने दुसरे डॉक्टर की सलाह लेने का निर्णय लिया। वह पुणे के द स्मॉल एनिमल क्लिनिक जाने का फैसला किया। मिसेज डोड्डनावर, जो शेल्बी की मालिक हैं, उनकी देखरेख में शेल्बी को १ अप्रैल २०२६ को क्लिनिक लाया गया। उस समय उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब थी। वह बहुत कमजोर था। उसकी दोनों किडनियां बहुत ज्यादा खराब हो चुकी थीं और ठीक से काम नहीं कर रही थीं। डॉक्टरों के अनुसार उसकी बचने की संभावना बहुत ही कम थी। ऐसी स्थिती में शेल्बी को तुरंत अस्पताल में दाखिल करके उसका इलाज शुरू किया।
पुणे के द स्मॉल एनिमल क्लिनिक के वेटरनरी सर्जन डॉ. नरेंद्र परदेशी ने कहा, “जब शेल्बी को 1 अप्रैल 2026 को क्लिनिक लाया गया, तब उसकी पूरी जांच की गई। इसमें सोनोग्राफी, ईसीजी, ब्लड प्रेशर चेक करना और खून की जांच शामिल थी। इन सभी जांचों से पता चला कि उसका क्रिएटिनिन लेवल 6.06 mg/dL था, जो सामान्य से बहुत ज्यादा है। इससे साफ पता चलता है कि उसकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही थी और उसकी हालत बहुत गंभीर थी। किडनी खराब होने का एक बड़ा कारण टिक फीवर (Tick Fever) भी था। जब शेल्बी को क्लिनिक में लाया गया, उस समय उसकी हालत बहुत ही ज्यादा खराब थी। उसकी दोनों किडनियां बहुत ज्यादा प्रभावित हो चुकी थीं और उनका काम लगभग बंद होने की स्थिति में था। उसका क्रिएटिनिन लेवल भी बहुत ज्यादा था। ऐसे में उसके ठीक होने की उम्मीद बहुत कम थी। इस तरह की हालत में अक्सर डॉक्टरों को लगता है कि अब इलाज से ज्यादा फायदा नहीं होगा, इसलिए कई बार इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) का विकल्प भी सोचा जाता है।”
केस की गंभीर स्थिति को देखते हुए, डॉक्टरों ने शेल्बी के लिए चार बार हेमोडायलिसिस करने की सलाह दी। साथ ही यह भी बताया गया कि अगर जरूरत पड़ी, तो किडनी ट्रांसप्लांट करना पड सकता हैं। डायलिसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें खून को साफ किया जाता है। यह शरीर में जमा हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता हैं। इससे किडनी को आराम मिलता है और उसे ठीक होने के लिए समय मिलता है, ताकि वह धीरे-धीरे फिर से अपना काम शुरू कर सके।
डॉ. नरेंद्र परदेशी ने आगे कहा, “शेल्बी का पहला डायलिसिस 1 अप्रैल 2026 को किया गया। इसके बाद एक दिन छोड़कर उसका डायलिसिस किया जाता रहा। डायलिसिस के बाद उसकी सेहत में सुधार होने लगा। ७ अप्रैल को तीसरे डायलिसिस तक उसका क्रिएटिनिन लेवल कम होकर ४.८५ mg/dL हो गया था। ७ अप्रैल के बाद डायलिसिस रोक दिया गया और उसे मुंह से दी जाने वाली दवाइयों पर रखा गया। धीरे-धीरे शेल्बी ने खुद से खाना और पानी लेना शुरू कर दिया। उसकी पेशाब की मात्रा भी पहले से बेहतर हो गई, जो एक अच्छा संकेत था। १७ अप्रैल तक उसका क्रिएटिनिन लेवल और कम होकर ३.५२ mg/dL हो गया। सोनोग्राफी रिपोर्ट में पता चला की, उसकी दोनों किडनियों में खून का प्रवाह पहले से बेहतर हो गया हैं, जिससे यह पता चलता है कि उसकी किडनी धीरे-धीरे ठीक हो रही है।”
डॉ. नरेंद्र परदेशी ने आगे कहा, “आज शेल्बी की हालत स्थिर है। वह पहले से ज्यादा एक्टिव हो गया है और पिछले १० दिनों से खुद अपनी किडनी के मरीजों के लिए बनाई गई खास डाइट खा रहा है। रेनल डाइट एक खास तरह का खाना होता है, जो किडनी की बीमारी वाले मरीजों के लिए बनाया जाता है ताकि उनकी किडनी पर ज्यादा दबाव न पड़े। अब शेल्बी को इंजेक्शन या आईवी फ्लूड की जरूरत नहीं है। उसकी किडनी की कब काम करने लगी है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो अगले हफ्ते उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
शेल्बी की रिकवरी सिर्फ इलाज की वजह से नहीं हुई, बल्कि उसे मिली देखभाल और प्यार की वजह से भी संभव हो पाई। क्लिनिक की टीम, धनश्री और तनुजा ने उसके सबसे कमजोर समय में उसकी बहुत अच्छी देखभाल की। उन्होंने उसे समय पर खाना खिलाया और उसकी हर जरूरत का ध्यान रखा, जिससे उसकी हालत सुधारने में बहुत मदद मिली। यह केस यह दिखाता है कि अगर बहुत गंभीर किडनी फेल्योर में भी समय पर सही इलाज किया जाए, जैसे डायलिसिस, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।



