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हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक ऐतिहासिक दरगाह को प्रशासन ने किया ध्वस्त : उपमहापौर परशुराम वाडेकर

सामान्य सभा में जवाब मांगेगा आरपीआई, प्रशासन पर मनमानी का आरोप

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पुणे : पुणे के बोपोडी क्षेत्र में स्थित लगभग 150 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक हजरत शमसुद्दीन दरगाह को महानगरपालिका प्रशासन द्वारा ध्वस्त किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। उपमहापौर एवं स्थानीय नगरसेवक परशुराम वाडेकर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी ठोस कारण, स्थानीय जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना तथा आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना यह कार्रवाई की गई है।

पत्रकार परिषद में बोलते हुए वाडेकर ने कहा कि संबंधित दरगाह को राज्य सरकार द्वारा ‘ए’ श्रेणी का दर्जा प्राप्त है और यह क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मानी जाती रही है। उन्होंने दावा किया कि न तो मेट्रो परियोजना और न ही सड़क चौड़ीकरण के कार्य में दरगाह कोई बाधा थी। साथ ही, इस संबंध में किसी स्थानीय नागरिक अथवा जनप्रतिनिधि की ओर से कोई शिकायत भी दर्ज नहीं की गई थी। वाडेकर के अनुसार, शिवशंकर स्वामी नामक एक व्यक्ति द्वारा दरगाह हटाने के लिए प्रशासन के समक्ष लगातार प्रयास किए जा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि दरगाह ट्रस्ट को पूर्व सूचना दिए बिना, कोई नोटिस जारी किए बिना तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जानकारी दिए बिना रात के समय यह कार्रवाई की गई, जो पुणे जैसे सांस्कृतिक शहर की छवि को धूमिल करने वाली है।

उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करती है और आगामी महानगरपालिका की सामान्य सभा में प्रशासन से इस विषय पर जवाब मांगा जाएगा। वाडेकर ने बताया कि इस मामले की जानकारी राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री चंद्रकांत पाटील को दी गई है और उन्होंने भी इस कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की है। साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित राज्य के अन्य वरिष्ठ नेताओं का भी ध्यान प्रशासन की कथित मनमानी की ओर आकर्षित किया जाएगा।

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