सीमा पर तैनात जवानों के लिए पुणे के स्व. श्रीमती लक्ष्मीबाई दगडूशेठ हलवाई दत्त मंदिर ट्रस्ट की पहल; भेजी जाएंगी 5,000 राखियां

पुणे: देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से पुणे के स्व. श्रीमती लक्ष्मीबाई दगडूशेठ हलवाई दत्त मंदिर ट्रस्ट ने रक्षाबंधन के अवसर पर सैनिकों के लिए 5,000 राखियां भेजने का निर्णय लिया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष पुनीत बालन ने जम्मू-कश्मीर के बारामुल्ला स्थित सेना की 19 इन्फैंट्री डिवीजन के मेजर जनरल मनोज जोशी को पत्र भेजकर इन राखियों को स्वीकार करने और जवानों तक पहुंचाने का अनुरोध किया है।बालन ने अपने पत्र में कहा कि पुणे महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी है और स्व. श्रीमती लक्ष्मीबाई दगडूशेठ हलवाई दत्त मंदिर पुणे शहर के आध्यात्मिक गौरव का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। ट्रस्ट की संस्थापिका स्व. श्रीमती लक्ष्मीबाई की स्मृति में ट्रस्ट द्वारा विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।इसी सामाजिक पहल के तहत रक्षाबंधन के अवसर पर देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए 5,000 राखियां भेजने का निर्णय लिया गया है।
इस पहल की खास बात यह है कि ये राखियां ‘सेवा सदन दिलासा कार्यशाला’ में तैयार की गई हैं। यह संस्था बौद्धिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कार्य करती है।ट्रस्ट का उद्देश्य पुणे की ओर से जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना है। पुनीत बालन ने सेना से इन राखियों को स्वीकार कर रक्षाबंधन के अवसर पर पुणेकरों की शुभकामनाएं जवानों तक पहुंचाने का अनुरोध किया है।इस पहल में ट्रस्ट के कार्यकारी न्यासी राजू बलकवडे, उपाध्यक्ष एडवोकेट विवेक भरगुडे, वर्षा थोरवे, कोषाध्यक्ष एडवोकेट सूरज थोरात, उत्सव प्रमुख नितिन पंडित, उप-उत्सव प्रमुख मनीषा खेडेकर, न्यासी डॉ. पराग कालकर और महेंद्रशेठ गाडवे का महत्वपूर्ण सहयोग मिला है।
“देश की रक्षा करने वाले जवानों के लिए 5,000 राखियां भेजना हमारे लिए गर्व की बात” – पुनीत बालन
ट्रस्ट के अध्यक्ष पुनीत बालन ने कहा कि स्व. श्रीमती लक्ष्मीबाई दगडूशेठ हलवाई दत्त मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष चुना जाना वे अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने कहा, “अपने परिवार से हजारों किलोमीटर दूर रहकर देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले हमारे जवान भाइयों के लिए ट्रस्ट की ओर से 5,000 राखियां भेजी जा रही हैं। ये राखियां बौद्धिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कार्य करने वाली ‘सेवा सदन दिलासा कार्यशाला’ में तैयार की गई हैं।”



