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भारतीय ज्ञान परंपरा का व्यापक प्रसार हो, ज्योतिष को प्रयासों का साथ देना चाहिए : डॉ. मंगेश कराड

साधना–सिद्धि गौरव महोत्सव में राज्य के ज्योतिर्विदों का चिंतन-मंथन

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पुणे, 7 जून :  ज्योति जोशी ज्योतिष इंस्टीट्यूट तथा अभिजीत प्रतिष्ठान (मुंबई) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘साधना–सिद्धि गौरव महोत्सव 2026’ आज पुणे में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कर्वे रोड स्थित होटल प्रेसिडेंट में प्रातः 8.30 बजे से सायं 6 बजे तक आयोजित इस महोत्सव में राज्यभर से ज्योतिषशास्त्र के विद्यार्थी, शोधकर्ता, अभ्यासक एवं गुरुजन बड़ी संख्या में सहभागी हुए। इस समारोह की अध्यक्षता आचार्य महामंडलेश्वर महंत सुधीरदास पुजारी ने की। उद्घाटन एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. डॉ. मंगेश कराड ने किया तथा उपस्थितों का मार्गदर्शन किया। स्वागताध्यक्ष के रूप में पुंडलिक दाते ने अतिथियों का स्वागत किया। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. गोविंद कुलकर्णी, ज्योतिषरत्न वेदमूर्ति गोरक्षनाथ पैठणकर गुरुजी, श्रीमती गौरी केंजळे, प्रिया मालवणकर, सुनील पुरोहित सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मंच पर उपस्थित थे। सभागार में चंद्रकांत शेवाळे, नंदकिशोर जकातदार, डॉ. नरेंद्र सहस्त्रबुद्धे सहित अनेक मान्यवर उपस्थित रहे।

महोत्सव के दौरान ज्योतिषशास्त्र के विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। साथ ही वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों का विशेष सम्मान कर उनके योगदान का गौरव किया गया। विभिन्न मार्गदर्शन सत्रों, पुस्तक विमोचन, गुरु आशीर्वचन तथा नई पीढ़ी को ज्योतिष क्षेत्र की ओर प्रेरित करने वाले कार्यक्रमों को उपस्थितों की ओर से उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला।

‘एक सफल ज्योतिषी बनने के लिए कौन-कौन सी शाखाएँ अनिवार्य हैं?’, ‘पुनर्विवाह योग का विश्लेषण कैसे करें?’, ‘जैमिनी महादशा का गूढ़ विश्लेषण’, ‘टैरो कार्ड और पुनर्जन्म’ जैसे विविध विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत मार्गदर्शन किया। उपस्थितों ने मत व्यक्त किया कि इस महोत्सव के माध्यम से पारंपरिक ज्योतिष ज्ञान और आधुनिक दृष्टिकोण के समन्वय का उद्देश्य सफलतापूर्वक साकार हुआ।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. मंगेश कराड ने कहा, “भारतीय ज्ञान परंपरा पर विश्वास रखते हुए ज्योतिषी अपना कार्य करते हैं। आज इस भारतीय शिक्षा पद्धति को पुनः प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है। यह अत्यंत गहन विषय है, जिसके लिए वेदों और पुराणों का अध्ययन आवश्यक है। ज्योतिष की विभिन्न परंपराओं और पद्धतियों के लिए हमें ऋषि-मुनियों का आभार व्यक्त करना चाहिए। यह समाज की एक महान शक्ति और अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण और प्रसार किया जाना चाहिए। यदि हम अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को भूल गए तो बहुत कुछ नष्ट हो जाएगा। संस्कृति के संवहन का कार्य ज्योतिष को भी करना चाहिए। केवल ज्योतिष देखने से नहीं, बल्कि जीवन में सतत प्रयासों का समावेश भी आवश्यक है। ज्योति जोशी ज्योतिष इंस्टीट्यूट और एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा एवं ज्योतिष विषयक पाठ्यक्रम संयुक्त रूप से प्रारंभ करने पर विचार कर रहे हैं। ये पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की रूपरेखा के अंतर्गत संचालित किए जाएंगे।”

महंत सुधीरदास पुजारी ने कहा, “भारतीय संस्कृति की शक्ति विज्ञान, अध्यात्म और अनुभव आधारित ज्ञान के सुंदर समन्वय में निहित है। नई पीढ़ी को अंधविश्वास के आधार पर नहीं, बल्कि अध्ययन, विवेक और संस्कारों के आधार पर ज्योतिष को समझना चाहिए। भारतीय मनीषा की यह अमूल्य विरासत समाज कल्याण के लिए संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।”

गोरक्षनाथ पैठणकर ने कहा, “जैसे कालगणना के विषय में व्यापक सहमति है, उसी प्रकार सभी ज्योतिषियों को एक मंच पर लाकर फलित ज्योतिष के विषय में भी एकरूपता विकसित की जानी चाहिए। केवल रील या यूट्यूब वीडियो देखकर ज्योतिष सीखने के बजाय दीर्घकालीन और गंभीर अध्ययन पर अधिक बल दिया जाना चाहिए।”

प्रास्ताविक में ज्योति जोशी ने कहा, “सुखी और संतुलित जीवन के लिए ज्योतिषियों को समुपदेशन की भूमिका भी निभानी चाहिए। वर्तमान समय की चुनौतियों को देखते हुए इसकी आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। ज्योतिषियों के शब्दों में जो प्रभाव और सामर्थ्य है, उसके पीछे ज्योतिषशास्त्र का गहन आधार है। ज्योतिषियों को समाज के लिए दिशादर्शक बनना चाहिए और अपने जातकों के जीवन में प्रकाश का संचार करना चाहिए।”

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