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अधिक मास पर ‘दगडूशेठ’ गणपति मंदिर में संपन्न हुआ ‘शुक्ल यजुर्वेद घन पारायण’

वेदमूर्ति मिलिंद राहुरकर गुरुजी के पौरोहित्य में हुए विविध धार्मिक अनुष्ठान

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पुणे : अधिक मास (धुंडीविनायक मास) के पावन अवसर पर श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट एवं सुवर्णयुग तरुण मंडल की ओर से दगडूशेठ गणपति मंदिर में ‘शुक्ल यजुर्वेद घन पारायण’ का आयोजन किया गया। इस दौरान गणेश नामावली हवन, गणेश पुराण हवन, सभी मराठी महीनों की चतुर्थी व्रत कथाओं का पाठ तथा धुंडीविनायक मास कथा हवन जैसे विविध धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में वेदमूर्ति मिलिंद राहुरकर गुरुजी के पौरोहित्य में प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक पारायण और हवन किए गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इसमें सहभाग लेकर भगवान गणेश की आराधना की।

गाणपत्य संप्रदाय की मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का ज्योतिष शास्त्र से संबंधित श्री ढुंढिराज अवतार अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाराजा दिवोदास के उद्धार के लिए यह दिव्य अवतार प्रकट हुआ था और स्वयं भगवान शिव ने उनका पूजन किया था। आज भी काशी में भगवान विश्वनाथ मंदिर के सामने स्थित श्री ढुंढिराज गणेश के दर्शन की परंपरा प्रचलित है तथा विश्वनाथ दर्शन से पूर्व उनके दर्शन को विशेष महत्व दिया जाता है।

इसी कारण गाणपत्य संप्रदाय में अधिक मास को ‘ढुंढिराज मास’ कहा जाता है। इस माह में श्री गणेश की पूजा, दुर्वार्चन, गणेश ग्रंथों का पारायण तथा गणेश मंत्रों के जप का विशेष महत्व माना जाता है।

ट्रस्ट के अनुसार इसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंदिर में पहले ‘चतुर्वेद स्वाहाकार’ और उसके बाद ‘शुक्ल यजुर्वेद घन पारायण’ का आयोजन किया गया, जिससे मंदिर परिसर में भक्तिमय और वैदिक वातावरण का निर्माण हुआ।

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