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‌ पुणे जिले में अतिवृष्टि का अलर्ट: कई तालुकों में भारी बारिश, प्रशासन सतर्क

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पुणे, 4 जुलाई। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा पुणे जिले के लिए जारी ऑरेंज अलर्ट के मद्देनजर जिला प्रशासन ने जिले में हुई वर्षा तथा उससे उत्पन्न स्थिति की प्राथमिक रिपोर्ट राज्य आपदा व्यवस्थापन विभाग को भेजी है। जिला आपदा व्यवस्थापन अधिकारी विक्रांत बनोटे द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार 3 और 4 जुलाई 2026 के दौरान जिले के कई हिस्सों में मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की गई, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार वेल्हे तालुका में सबसे अधिक 90.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा मावल में 64.5 मिमी, मुळशी में 55.1 मिमी, भोर में 53.2 मिमी, खेड में 30.4 मिमी, जुन्नर में 10.8 मिमी, आंबेगांव में 10.7 मिमी, बारामती में 5.2 मिमी, शिरूर में 3.0 मिमी, इंदापुर में 2.3 मिमी तथा दौंड में 2.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। जिले में औसतन 24.5 मिमी वर्षा हुई।
भारी वर्षा के कारण जिले के 18 मंडलों में 65 मिमी से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। इनमें मुलशी तालुका के माले (70.5 मिमी), भूगांव (70.5 मिमी), ताम्हिणी (65.8 मिमी), पौड (70.3 मिमी) तथा आवलस (146.5 मिमी) प्रमुख रहे।
मावल तालुका में भालवड (74 मिमी), आंबवडे (68.8 मिमी), निगडे (68.8 मिमी), वडगांव (77.5 मिमी), कामशेत (77.5 मिमी), लोणावळा (87 मिमी), तळेगांव (77.5 मिमी), पवनानगर (77.5 मिमी) तथा कुुसगांव (87 मिमी) में भारी वर्षा दर्ज की गई। वहीं वेल्हे तालुका के वेल्हे (166.3 मिमी) और गुंजवणे (70 मिमी) तथा खेड तालुका के पाईट (77.5 मिमी) और कान्हेवाडी (77.5 मिमी) में भी 65 मिमी से अधिक वर्षा हुई।
अतिवृष्टि के कारण कुछ स्थानों पर घटनाएं भी सामने आई हैं। हवेली तालुका के सिंहगढ़ किले की पायरी मार्ग पर पहले दरवाजे के पास चट्टान का एक हिस्सा गिर गया। हालांकि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या घायल होने की सूचना नहीं है। पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
इसी प्रकार भोर तालुका के कुसगांव–हिर्डी मार्ग पर चट्टान गिरने से कुछ समय के लिए यातायात बाधित हुआ। सूचना मिलते ही सार्वजनिक बांधकाम विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मलबा हटाकर मार्ग को पुनः यातायात के लिए चालू कर दिया।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें, अनावश्यक रूप से नदी, नालों, घाट क्षेत्रों और भूस्खलन संभावित स्थानों पर जाने से बचें ।

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