ज्ञानसूर्य अस्त हो गया, लेकिन उनका तेज चिरंतन रहेगा; पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटील का निधन
91 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; शिक्षा जगत में शोक की लहर, 5 अगस्त को कोल्हापुर में अंतिम संस्कार

कोल्हापुर, 4 अगस्त 2026। शिक्षा जगत को मंगलवार को गहरा आघात लगा। प्रख्यात शिक्षाविद्, समाजसेवी, पूर्व राज्यपाल और डॉ. डी. वाय. पाटील समूह के संस्थापक पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटील (दादा) का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मंगलवार सुबह 11 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से शिक्षा, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
22 अक्टूबर 1935 को जन्मे डॉ. डी. वाय. पाटील ने अपना पूरा जीवन शिक्षा के प्रसार और समाजसेवा को समर्पित किया। उन्होंने केवल शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना नहीं की, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के सपनों को दिशा दी और शिक्षा को समाज परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाया। उनके दूरदर्शी नेतृत्व, सादगी, मानवतावादी दृष्टिकोण और शिक्षा के प्रति अटूट निष्ठा ने उन्हें देश के प्रमुख शिक्षाविदों में विशेष स्थान दिलाया।
डॉ. डी. वाय. पाटील ने विभिन्न क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अनेक शिक्षण संस्थाओं का निर्माण किया। आज भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में उनकी संस्थाओं से शिक्षा प्राप्त करने वाले हजारों विद्यार्थी अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। उनका मानना था कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को बदलने की सबसे प्रभावी शक्ति है।
शिक्षा को बनाया जीवन का ध्येय
डॉ. डी. वाय. पाटील के निधन पर डॉ. पी. डी. पाटील, कुलपति, डॉ. डी. वाय. पाटील विद्यापीठ, पिंपरी, पुणे ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दादा का निधन परिवार और व्यक्तिगत रूप से उनके लिए बेहद बड़ा आघात है।
उन्होंने कहा कि डॉ. डी. वाय. पाटील ने शिक्षा को ही अपना जीवनकर्तव्य माना। स्वर्गीय वसंतदादा पाटील ने 1980 के दशक में उच्च शिक्षा के अवसर सामान्य परिवारों के बच्चों तक पहुंचाने के लिए गैर-अनुदानित शिक्षण संस्थाएं शुरू करने को प्रोत्साहित किया था। इस अभियान में योगदान देने वाले प्रमुख लोगों में डॉ. डी. वाय. पाटील भी शामिल थे।
डॉ. पी. डी. पाटील ने कहा कि दादा ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विषयों की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संस्थाओं का व्यापक नेटवर्क खड़ा किया। उन्होंने सक्रिय राजनीति के आकर्षण से दूर रहकर स्वयं को एक उत्कृष्ट शिक्षाविद् के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा। शिक्षा ही उनका ध्येय था और अंतिम समय तक उनका जीवन इसी क्षेत्र के प्रति समर्पित रहा।
उन्होंने कहा कि ज्ञान का उपयोग समाज परिवर्तन के लिए करने की डॉ. डी. वाय. पाटील की प्रेरणा केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए दीपस्तंभ की तरह मार्गदर्शक बनी रहेगी।
5 अगस्त को होगा अंतिम संस्कार
पद्मश्री डॉ. डी. वाय. पाटील का अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार बुधवार, 5 अगस्त 2026 को कोल्हापुर में होगा।
अंतिम दर्शन: सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक
स्थान: यशवंत निवास, कसबा बावडा, कोल्हापुर
अंतिम यात्रा: शाम 4 बजे, यशवंत निवास से
अंतिम संस्कार: शाम 5 बजे, डॉ. डी. वाय. पाटील मेडिकल कॉलेज एवं विश्वविद्यालय परिसर, लाइन बाजार, कसबा बावडा, कोल्हापुर
डॉ. डी. वाय. पाटील के निधन से शिक्षा जगत ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने शिक्षा को संस्थाओं की चारदीवारी से निकालकर समाज परिवर्तन का माध्यम बनाया। उनका कार्य, विचार और शिक्षा के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।



