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पुणे जर्मन बेकरी आतंकवादी हमले के 16 वर्ष पूर्ण: नागरिकों ने शहीदों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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पुणे:  वर्ष 2010 में हुए जर्मन बेकरी आतंकवादी हमले को आज 16 वर्ष पूर्ण हो गए हैं, किंतु उस भयावह दिन की पीड़ा और स्मृतियाँ आज भी उतनी ही ताज़ा हैं। हमले की 16वीं वर्षी पर पुणे के कोरेगांव पार्क स्थित जर्मन बेकरी विस्फोट स्थल पर नागरिक एकत्रित हुए और 17 निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने इस जघन्य आतंकवादी हमले में अपने प्राण गंवाए थे। यह हमला केवल पुणे या भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को झकझोर देने वाला था। इस घटना में भारत, ईरान, सूडान, नेपाल और इटली के नागरिकों की मृत्यु हुई थी, जो इस बात का प्रतीक है कि आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती। मृतकों में अधिकांश युवा थे, जिनकी आयु 30 वर्ष से कम थी। उनके सपनों और उज्ज्वल भविष्य को नफरत और हिंसा ने निर्ममता से समाप्त कर दिया। यह त्रासदी आज भी इस बात की मार्मिक याद दिलाती है कि आतंकवाद मानवता, सौहार्द और आशा को निशाना बनाता है।

इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जर्मन बेकरी के संचालक शंकर भाऊ खरोजे, मनोज खरोजे और संतोष भोसले; एमपीसीसी के पूर्व सचिव डॉ. हाजी जाकिर शेख; आरपीआई के पुणे युवा अध्यक्ष एवं आधिकारिक प्रवक्ता बुद्धिशा जयदेव रंधावे; झोपड़पट्टी सुरक्षा दल, पुणे के अध्यक्ष गणेश लांडे; जर्मन बेकरी रिक्शा एसोसिएशन के अध्यक्ष हबीबी शेख; नगरसेवक उमेश गायकवाड़, हिमाली ताई कांबले, सुरेखा ताई कवाड़े और राजेंद्र (बाबू) वागस्कर सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों, नागरिकों और स्थानीय निवासियों ने उपस्थित रहकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम के दौरान दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई तथा मौन रखकर दीप प्रज्वलित किए गए। वक्ताओं ने इस हमले से उत्पन्न वैश्विक दहशत को स्मरण करते हुए आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट रहने और शांति, एकता तथा मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

16 वर्ष बीत जाने के बाद भी लोग हर वर्ष इसी स्थान पर एकत्र होते हैं, क्योंकि अनेक लोगों के लिए यह घटना आज भी मानो कल की ही बात प्रतीत होती है। घाव आज भी शेष हैं, किंतु स्मृति के साथ-साथ संकल्प भी जीवित है — भय के विरुद्ध खड़े रहने का, शांति को बनाए रखने का और मानवता को सर्वोपरि मानने का।
शहीदों के प्राण भले ही चले गए हों, किंतु उनकी स्मृतियाँ सदैव जीवित रहेंगी और संसार को यह संदेश देती रहेंगी कि आतंकवाद कभी भी मानव आत्मा को पराजित नहीं कर सकता।

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