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जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में मोटापा गंभीर समस्या – विशेषज्ञ
विश्व स्वास्थ्य दिवस

पुणे ; मधुमेह और उच्च रक्तचाप के साथ उसके पीछे मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या में तेज़ी से हो रही वृद्धि चिंताजनक है, ऐसा विशेषज्ञों ने कहा. भारत में अभी लगभग 24 प्रतिशत महिलाएँ और 23 प्रतिशत पुरुष मोटापे से ग्रस्त हैं (एनएफएचएस-5, 2019–21). वर्ल्ड ओबेसिटी ॲटलस के अनुसार, मोटापे के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है. यह देश के सामने एक बड़ी चुनौती है.
मोटापा अब केवल जीवनशैली से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है, बल्कि इसे एक वैद्यकीय स्थिति के रूप में भी मान्यता दी गई है.हाल ही में आंतरराष्ट्रीय वैद्यकीय कोडिंग प्रणाली (आईसीडी) में मोटापे को औपचारिक रूप से एक बीमारी के रूप में वर्गीकृत किया गया है.
हर साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर समग्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाती है. इस वर्ष की थीम “हेल्थ फॉर ऑल – स्टँड बाय सायन्स” है. इसका मतलब है कि मोटापे को केंद्र में रखते हुए बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वस्थ जीवनशैली, नियंत्रित वजन और मोटापा होने पर वैज्ञानिक उपचार के बारे में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है.
नोबल हॉस्पिटल अँड रिसर्च सेंटर के ओबेसिटी और बैरिएट्रिक विशेषज्ञ डॉ. परमेश्वर बंबरुळे ने कहा कि मोटापे के मामलों में लोगों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है. मोटापे का उपचार नहीं किया गया तो मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मेटाबोलिक डिसऑर्डर और अन्य कई जटिलताएँ हो सकती हैं. मोटापा लगभग 230 स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है. समय पर निदान और वैज्ञानिक उपचार से इन जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है.
उन्होंने आगे बताया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की मेटाबोलिज्म प्रणाली धीमी हो जाती है और मांसपेशियों कमजोर होने लगती हैं.बहुत से लोग सोचते हैं कि मोटापा क्यों बढ़ रहा है जबकि हमारा आहार वही रहता है. एक और कारण यह है कि हमारे आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक और प्रोटीन की मात्रा कम होती है. विशेष रूप से 30 वर्ष की आयु के बाद इस पर ध्यान देना बहुत महत्वपूर्ण है.
मोटापे के दो पहलू होते हैं, एक मतलब वजन और दूसरा, जो अधिक जोखिमपूर्ण है, वह है पेट का घेरा. यह समस्या आशियाई लोगों में अधिक देखी जाती है. संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली का महत्व लोगों तक लगातार पहुँचाना प्रभावी हो सकता है.
अब मोटापे को एक वैद्यकीय स्थिति के रूप में मान्यता मिल चुकी है, इसलिए इसके मूल कारणों को समझना आवश्यक है. आहार और व्यायाम से नियंत्रण संभव है, लेकिन बीमारी बाद की स्थिति गंभीर हो जाए तो वैद्यकीय व्यवस्थापन की आवश्यकता पड़ सकती है. आधुनिक उपचार पद्धतियों के माध्यम से समय पर निदान और उपचार करके संबंधित जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है. वजन कम करने की हर पड़ाव में मार्गदर्शन मिलना आवश्यक है.



