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चुनावी राजनीति’ से देश को नुकसान, महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस का हमला

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पुणे : जब पुरे देश भर में संवैधानिक, लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक भारत के निर्माता एवं पूज्य डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है। इसी बीच केंद्र सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन’ संशोधन एवं दुरुस्ती विधेयक के माध्यम से डॉ. आंबेडकर द्वारा अपेक्षित सामाजिक समानता और शेष पिछड़े वर्ग की महिलाओं के आरक्षण को दरकिनार करने का प्रयास कर रही है। यह कड़ी टिपण्णी करते हुए महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपाळदादा तिवारी ने कहा, मोदी सरकार ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक के माध्यम से सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्य से भटक रही है और यह कदम केवल चुनावी लाभ के लिए उठाया गया है।, इसके आगे उन्होंने कहा , “पश्चिम बंगाल व तामिलनाडू” इन दोनों राज्यों में, और खासकर बंगाल में, ममता दीदी की मर्ज़ी के खिलाफ चुनाव होने पर, मोदी सरकार का महिलाओं की हमदर्दी पाने और यह दिखाने के लिए कि वह महिलाओं के लिए कुछ कर रही है, ’30 महीने बाद उसी महिला बिल को फिर से बदलने की धमकी’ देना, सिर्फ़ ‘चुनावी और सत्ता की भूखी राजनीति की निशानी’ है।

तिवारी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर का उद्देश्य सामाजिक समानता और पिछड़े वर्गों का उत्थान था, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा लाए गए संशोधित विधेयक में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) महिलाओं के आरक्षण को लेकर स्पष्टता नहीं है, जो उनके विचारों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव को देखते हुए यह विधेयक लाया गया, ताकि महिलाओं की सहानुभूति हासिल की जा सके। यह कदम “चुनाव-जीवी राजनीति” का उदाहरण है। कांग्रेस ने दावा किया कि देश में सबसे पहले 33% महिला आरक्षण स्थानीय स्वराज संस्थाओं में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में लागू किया गया था। पार्टी ने यह भी कहा कि उसने शुरू से ही महिला आरक्षण का समर्थन किया है।

केंद्र सरकार द्वारा 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक के अनुसार, लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण 2029 से लागू होगा, जो जनगणना और परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के हवाले से तिवारी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को जल्दबाजी में लाया गया है और इसके पीछे राजनीतिक उद्देश्य छिपा है। उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जाति आधारित जनगणना से बचने का आरोप भी लगाया। पार्टी का कहना है कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में जातीय जनगणना पूरी की है, तो केंद्र सरकार देरी क्यों कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि लोकसभा सीटों के पुनर्गठन में केवल गणितीय आधार नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि जनसंख्या नियंत्रण और साक्षरता में बेहतर काम करने वाले राज्यों के साथ अन्याय न हो।

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