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सत्ता पक्ष के विरोधी राष्ट्रद्रोही नहीं, बल्कि राष्ट्रहितैषी : गोपालदादा तिवारी

सत्ताधारियों की गलतियों पर सवाल उठाने वालों को ‘दिमागी नक्सली’ कहना सत्ता की लालची मानसिकता : तिवारी

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पुणे : सत्ता पक्ष की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले नागरिक, राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और विद्यार्थी राष्ट्रद्रोही नहीं, बल्कि राष्ट्रहितैषी हैं। सत्ताधारियों की गलतियों पर उंगली उठाने वालों को ‘दिमागी नक्सली’ कहना सत्ता की लालची और स्वार्थी मानसिकता को दर्शाता है। यह आरोप महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने लगाया।

तिवारी ने कहा कि दुनिया में भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ बताने वाला भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ही लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत व्यवहार कर रहा है। देश के विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य तथा राष्ट्रहित के बारे में स्वतंत्र रूप से विचार करने वाले राजनीतिक नेताओं, सिविल सोसायटी के सदस्यों और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े लोगों को ‘दिमागी नक्सली’ कहना लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है। देश में केवल चुनाव आधारित राजनीति करने और सत्ता हासिल करने के बाद भी यदि विद्यार्थियों, युवाओं, किसानों तथा छोटे उद्यमियों के हित में जनहितकारी शासन नहीं चलाया जाता, तो विभिन्न स्तरों पर आवाज उठना स्वाभाविक है।

गोपालदादा तिवारी ने आरोप लगाया कि सत्ता की लालसा के कारण भाजपा का शीर्ष नेतृत्व यह भूल जाता है कि भारत में प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्र रूप से विचार करने और संविधान के दायरे में अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक ओर संसद की सीढ़ियों पर सिर झुकाकर सम्मान व्यक्त किया और दूसरी ओर संसद के प्रति अपने संवैधानिक उत्तरदायित्व से बचने का प्रयास किया। संविधान के समक्ष नतमस्तक होने के बावजूद संवैधानिक मूल्यों की रक्षा नहीं की जा रही है, ऐसा आरोप भी उन्होंने लगाया।

उन्होंने कहा कि ‘नागरिकों को केंद्र बिंदु’ बताने के साथ-साथ उनके संवैधानिक अधिकारों पर दबाव बनाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सत्ता से सवाल पूछने वाले नागरिकों को चुप कराने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं और सवालों का जवाब देना चाहिए।

22 अगस्त को पुणे आएंगे राहुल गांधी

तिवारी ने बताया कि देश में लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के समक्ष उत्पन्न संकट के बीच विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य को लेकर उनकी समस्याएं जानने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी 22 अगस्त को पुणे आ रहे हैं। उन्होंने पुणे को ‘विद्या का माहेरघर’ और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी बताते हुए कहा कि राहुल गांधी का पुणे दौरा विद्यार्थियों के लिए अपनी समस्याएं सीधे रखने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपनी ज्वलंत समस्याएं और भविष्य से जुड़े मुद्दे सामने रखने की अपील की।

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