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ग्लेशियरों को बचाने के लिए ग्लोबल वार्मिंग रोकने की अपील- राजेंद्र कुमार सराफ

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पुणे . ग्लेशियर जल चक्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पानी बर्फ के रूप में संग्रहित किया जाता है। ग्लेशियर जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं – उनका पिघला हुआ पानी पेयजल, कृषि, उद्योग, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक है। तेजी से पिघलते ग्लेशियर जल प्रवाह में अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं, जिसका लोगों और ग्रह पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। यदि ग्लेशियर पिघलेंगे तो समुद्र का स्तर बढ़ जाएगा और शहर जलमग्न हो जाएंगे। ग्लेशियरों का हमारे लिए धार्मिक महत्व है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील पर निवास करते हैं। यदि वैश्विक तापमान में वृद्धि जारी रही तो हिमालय पिघल जाएगा और गंगा में पानी नहीं बहेगा, जिससे अगले महाकुंभ के आयोजन पर संदेह पैदा हो जाएगा। यह सब ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहा है। इसे रोकने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्पादन और उत्सर्जन को कम करना आवश्यक है। ऊर्जा का कुशल उपयोग, ऊर्जा खपत में कमी, सौर एवं स्वच्छ ऊर्जा का अधिक उपयोग, वृत्तीय अर्थव्यवस्था, शून्य कार्बन आदि अवधारणाओं को क्रियान्वित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक और मराठी विज्ञान परिषद के अध्यक्ष रो आर.वी. सराफ ने सभी से अपील की वे अपने दैनिक जीवन में जल, ऊर्जा और अन्य संसाधनों का यथासंभव कम उपयोग करें।  वह विश्व जल दिवस के अवसर पर इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, रोटरी क्लब ऑफ पुणे अपटाउन और अन्य संबद्ध संगठनों द्वारा ग्लेशियर बचाओ थीम पर आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम की शुरुआत कलश पूजन और भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की तस्वीर पर माल्यार्पण के साथ हुई. इस अवसर पर रोटरी क्लब ऑफ पुणे अपटाउन के अध्यक्ष अरविंद मिथसागर, मराठी विज्ञान परिषद के अध्यक्ष डॉ. आर.वी. सराफ, इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के सचिव उत्तम अवारी, डॉ. मकरंद नानिवाडेकर, डॉ. समीर शास्त्री, डॉ. शैलजा देशपांडे, श्री आशीष कुमार सिंघल, डॉ. अशोक मोरे, श्री संजय जवंजाल, डॉ. सुजाता कोडाग, संजीव अत्रे आदि उपस्थित थे।

हिमालय में कई बार पहाड़ों पर चढ़ाई कर चुके आर्किटेक्ट पूर्वा शिंदे सिंह ने बताया कि “लगातार बर्फ से ढके रहने वाले हिमालय में अब कुछ स्थानों पर चट्टानें और पत्थर दिखाई दे रहे हैं। नदी का स्रोत अब बदल गया है। यदि निकटवर्ती गांव का तालाब भर गया तो गांवों के जलमग्न होने का खतरा है। उन्होंने सभी पर्वतारोहियों को सलाह दी कि वे पहाड़ों पर भ्रमण के दौरान किसी भी प्रकार का अपशिष्ट उत्पन्न न करके प्रकृति का संतुलन बनाए रखें।

रोटरी क्लब ऑफ पुणे अपटाउन के अध्यक्ष अरविंद मिथसागर ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा रोटरी के सात मुख्य लक्ष्यों या कार्यक्रमों में से एक है। चूंकि रोटरी का लक्ष्य 2040 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य करना है, इसलिए रोटरी क्लब ऑफ पुणे अपटाउन हमेशा ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेता है। रोटरी यूथ एक्सचेंज के तहत बर्लिन विश्वविद्यालय से आए श्री फ्लोरियन और श्री मैक्स शैलजा देशपांडे, शीर घालसासी और श्री सिंघल तथा श्री फ्लोरियन और श्री मैक्स ने अपने विचार रखे।

ग्लेशियर बचाओ की अवधारणा पर आधारित पोस्टर प्रदर्शनी में आठ समूहों ने भाग लिया। प्रतियोगियों और विजेताओं गायत्री गुगे, कार्तिक उमटे और समृद्धि सूर्यवंशी को सम्मानित किया गया। इस विश्व जल दिवस पर, आइए हम ग्लेशियरों को बचाने का संकल्प लें। सभी ने जलवायु परिवर्तन और वैश्विक जल संकट से निपटने के लिए मिलकर काम करने की भी शपथ ली। डॉ. समीर शास्त्री ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन प्रथम ढगे एवं गुणमयी पालोड ने किया।

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