‘सुमिरन’ के पहले ही आयोजन ने कोथरूडवासियों को किया मंत्रमुग्ध!
चंद्रकांतदादा पाटील की पहल पर सजी भक्ति संगीत की अविस्मरणीय संध्या

पुणे । मयूर कॉलोनी स्थित एमईएस बालशिक्षण ऑडिटोरियम में गुरुवार शाम सुरों का अद्भुत संसार साकार हुआ। उपस्थित प्रत्येक रसिक को भावविभोर और मंत्रमुग्ध कर देने वाली यह संगीतमय संध्या राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा कोथरूड के लोकप्रिय विधायक चंद्रकांत पाटील की विशेष पहल पर आयोजित की गई थी। देवगांवकर फाउंडेशन के संयोजन में आयोजित ‘सुमिरन’ के पहले ही भावगीत और भक्तिगीत कार्यक्रम ने श्रोताओं के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ दी।
आज की भागदौड़, डिजिटल और यांत्रिक जीवनशैली के बीच भावगीत और भक्तिगीतों की यह महफिल मानो रेगिस्तान में मीठे झरने जैसी अनुभूति दे रही थी। कला प्रेमी और जागरूक कोथरूडवासियों के मन में संगीत का आनंद निरंतर बना रहे, इसी संवेदनशील विचार से विधायक चंद्रकांतदादा पाटील की प्रेरणा से यह निशुल्क संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विशेष बात यह रही कि राजनीतिक व्यस्तताओं के बावजूद स्वयं चंद्रकांतदादा पाटील पूरे समय कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित रहे। आम श्रोताओं के बीच बैठकर एक सच्चे कला रसिक की तरह वे भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए। उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और अधिक बढ़ गई।
प्रसिद्ध गायक अमोल निसळ की भावपूर्ण गायकी, बांसुरी वादक अमर ओक की दिव्य बांसुरी और युवा गायक करण देवगांवकर के मधुर प्रस्तुतिकरण ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों को तालियों की गड़गड़ाहट के बीच भरपूर सराहना मिली।
अमर ओक की बांसुरी के सुरों के साथ मानो श्रोताओं के मन की पुरानी यादें, सुख-दुःख और ईश्वर के प्रति आत्मीय भाव जागृत हो उठे। कार्यक्रम के अंत में प्रत्येक रसिक संतुष्ट मन और अविस्मरणीय आनंद की सौगात लेकर घर लौटा।
इस अवसर पर चंद्रकांत पाटील ने कहा, “पेट की भूख मिटने के बाद मन की भूख जन्म लेती है और ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम उस भूख को संतुष्ट करने का कार्य करते हैं। हर व्यक्ति के भीतर एक कलाकार छिपा होता है, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों और परिस्थितियों के कारण अनेक लोगों को अपने कला गुण प्रस्तुत करने का अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे कलाकारों को उचित मंच उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।”



