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पुणे के ऐतिहासिक एम्प्रेस बॉटनिकल गार्डन का अस्तित्व संकट में

जमीन हस्तांतरण के फैसले का विरोध

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पुणे: शहर की पहचान और पर्यावरण का महत्वपूर्ण आधार माने जाने वाले एम्प्रेस बॉटनिकल गार्डन पर इन दिनों अस्तित्व का खतरा मंडरा रहा है। राज्य सरकार द्वारा इस ऐतिहासिक गार्डन की लगभग एक एकड़ भूमि न्यायालय भवन निर्माण के लिए हस्तांतरित करने की तैयारी किए जाने से विवाद गहरा गया है। इस फैसले का विरोध करते हुए गार्डन का संचालन कर रही दि एग्री-हॉर्टिकल्चरल सोसायटी ऑफ वेस्टर्न इंडिया ने इसे पर्यावरण और विरासत दोनों के लिए गंभीर खतरा बताया है।

सुरेश पिंगळे ,मानद सचिव ने कहा, वर्ष 1892 से लगातार इस गार्डन का संरक्षण किया जा रहा है और यहां सैकड़ों दुर्लभ वृक्षों एवं वनस्पतियों को बचाकर रखा गया है। इतने लंबे समय से बिना किसी सरकारी आर्थिक सहायता के इस हरित क्षेत्र को जीवित रखना अपने आप में एक उदाहरण है। परन्तु संस्था का आरोप है कि सरकार उनकी आपत्तियों और सुझावों को नजरअंदाज कर जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। कई बार ज्ञापन और विरोध प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया।

हस्तांतरण के फैसले से जैव विविधता पर खतरा
जिस जमीन को हस्तांतरित करने की योजना है, वहां संस्था ने भविष्य में “बायोडायवर्सिटी पार्क” विकसित करने की योजना के तहत सैकड़ों पौधे लगाए हैं। यदि यहां कंक्रीट का निर्माण होता है, तो यह पूरा हरित क्षेत्र समाप्त हो सकता है और शहर के पर्यावरण पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

पुणे के ‘ग्रीन लंग्स’ को बचाने की अपील
संस्था ने पुणे के नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों से इस मुद्दे पर आगे आने और गार्डन को बचाने की अपील की है। संस्था का कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन इसके लिए शहर की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय धरोहरों की कीमत नहीं चुकाई जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

 

कोट – 

सरकार द्वारा भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद संस्था ने कई बार आंदोलन, ज्ञापन और विरोध दर्ज किया। लेकिन संस्था की बातों को नजरअंदाज करते हुए सरकार दमनकारी रवैया अपना रही है। यह भूमि अधिग्रहण पर्यावरण संरक्षण करने वाली एक स्वायत्त संस्था के अधिकारों का उल्लंघन है।

प्रताप पवार – अध्यक्ष ,एम्प्रेस बॉटनिकल गार्डन.  

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