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सखी-सुखदा फाउंडेशन द्वारा नवजात एवं छोटे बच्चों के लिए निःशुल्क श्रवण (हियरिंग) जांच एवं विशेषज्ञ परामर्श शिविर

निःशुल्क श्रवण जांच शिविर में कई माताओं की आंखें हुईं नम

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“मां… सचमुच मेरा बच्चा सुन सकता है!”
निःशुल्क श्रवण जांच शिविर में कई माताओं की आंखें हुईं नम

पुणे (कोथरुड)। महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा कोथरुड के विधायक चंद्रकांतदादा पाटील की पहल पर सखी-सुखदा फाउंडेशन द्वारा नवजात एवं छोटे बच्चों के लिए निःशुल्क श्रवण (हियरिंग) जांच एवं विशेषज्ञ परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। शिविर को माताओं का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला और करीब 100 बच्चों की श्रवण जांच की गई।

 

हर मां अपने बच्चे की पहली आवाज, पहली मुस्कान और उसके मुंह से निकले पहले “मां” शब्द का इंतजार करती है। लेकिन यदि बच्चा ठीक से सुन नहीं पा रहा हो तो यह चिंता किसी भी परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक होती है। इसी संवेदनशील सोच के साथ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के नवजात और छोटे बच्चों की समय पर श्रवण जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह विशेष शिविर आयोजित किया गया।

जांच के बाद कई माताओं ने जब अपने बच्चों की रिपोर्ट सामान्य पाई तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। कई माताओं ने भावुक होकर कहा, “मां… सचमुच मेरा बच्चा सुन सकता है!” वहीं जिन बच्चों में किसी प्रकार की समस्या की आशंका मिली, उनके माता-पिता को आगे के उपचार और विशेषज्ञ सलाह की जानकारी दी गई।

डॉ. संवाद स्पीच-हियरिंग क्लिनिक एंड रिसर्च फाउंडेशन की निदेशक शिल्पा हुजूरबाजार, प्राजक्ता हुजूरबाजार और यश हुजूरबाजार ने बताया कि यदि श्रवण दोष का समय रहते पता चल जाए तो उपचार और पुनर्वास जल्दी शुरू किया जा सकता है। इससे बच्चे के बोलने, भाषा सीखने और बौद्धिक विकास को सही दिशा मिलती है और उसका भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है।

शिविर में उपस्थित माताओं और अभिभावकों ने इस जनहितकारी पहल के लिए मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील तथा सखी-सुखदा फाउंडेशन की निदेशक स्मिता पाटील का आभार व्यक्त किया। अभिभावकों ने कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर नवजात बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए किए जाने वाले ऐसे प्रयास समाज में विश्वास और आशा का संचार करते हैं।

 

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