वन नेशन, वन इलेक्शन’ सत्ता में लंबे समय तक बने रहने की कवायद : कांग्रेस
विधेयक को न्यायपालिका के कथित कवच में रखने का प्रयास लोकतांत्रिक और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ : गोपालदादा तिवारी

पुणे। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ प्रस्ताव को लेकर केंद्र की भाजपा-नीत सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर करने के बाद अब सत्ता में लंबे समय तक बने रहने के उद्देश्य से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की कवायद की जा रही है।
गोपालदादा तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर समिति गठित की थी। इसके बावजूद संसद के भीतर और बाहर इस प्रस्ताव को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों तथा संवैधानिक और लोकतांत्रिक परंपराओं से जुड़े सवालों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि इस विषय पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की ओर से न्यायपालिका के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ चर्चा किए जाने की बात सामने आ रही है। 6 अक्टूबर को दिल्ली में दोपहर 3.40 बजे बैठक प्रस्तावित होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे गंभीर आपत्तिजनक विषय बताया. तिवारी ने कहा कि संसद कानून बनाती है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय किसी कानून की संवैधानिक वैधता की न्यायिक समीक्षा करता है। ऐसे में किसी विधेयक को लेकर न्यायपालिका के वरिष्ठ पदाधिकारी के साथ चर्चा का हवाला देकर उसे न्यायिक समर्थन या संरक्षण मिलने का माहौल बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार किसी विधेयक को सर्वोच्च न्यायपालिका की कथित सिफारिश या संरक्षण दिलाने का प्रयास किया जा रहा है? तिवारी ने वरिष्ठ विधिवेत्ता और इंडिया गठबंधन के नेता कपिल सिब्बल द्वारा इस मामले में जताई गई आपत्ति का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने रखा है।
तिवारी ने कहा कि चुनाव व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव से पहले संसद, संवैधानिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों के बीच व्यापक चर्चा तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।



