वारसास्थलोंपर मुलभुत सुविधाएँ जल्द उपलब्ध कराने की सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी की राज्यसभा में मांग

पुणे: जागतिक वारसास्थलों पर बदहाल मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठा। महाराष्ट्र के यूनेस्को मानांकित किलों और अन्य धरोहर स्थलों पर स्वच्छता, पेयजल, जानकारी के फलक, डिजिटल गाइड और दिव्यांग-अनुकूल सुविधाओं की भारी कमी को लेकर राज्यसभा सदस्य प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने गंभीर चिंता व्यक्त की और इन स्थलों के विकास के लिए विशेष ‘हेरिटेज इन्फ्रा अपग्रेडेशन पैकेज’ की मांग की।
उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की गौरवशाली परंपरा और हिंदवी स्वराज्य की विरासत को दर्शाने वाले महाराष्ट्र के 11 किले यूनेस्को की 47वीं विश्व धरोहर समिति की सूची में शामिल होना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है। शिवनेरी, राजगढ़, रायगढ़ जैसे इतिहाससमृद्ध किलों के साथ अजंता–वेरूळ, घारापुरी और शनिवारवाड़ा जैसे स्थल पहले से ही विश्व धरोहर का दर्जा रखते हैं, लेकिन इन धरोहरों की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने बताया कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक इन स्थलों पर पहुंचते हैं, परंतु वहां स्वच्छ शौचालय नहीं हैं, पीने के पानी की व्यवस्था कमजोर है, डिजिटल सूचना या गाइड की सुविधा उपलब्ध नहीं है, और कई जगह कचरे व प्लास्टिक की भारी समस्या है। दिव्यांगों के लिए भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने से पर्यटकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अपने हालिया राजगढ़ दौरे का उल्लेख करते हुए कुलकर्णी ने कहा कि किले पर शौचालय कचरे से भरे हुए थे, प्लास्टिक की बोतलें और रैपर चारों ओर बिखरे थे और कई जगह कचरा जलाया जा रहा था, जिससे पर्यावरण को नुकसान और वन्यजीवों के लिए खतरा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने महाराणी सईबाई की समाधि के उपेक्षित स्वरूप तथा संजीवनी माची जैसी दुर्लभ वास्तु संरचनाओं पर जानकारी फलक न होने की समस्या भी सदन के समक्ष रखी।
उन्होंने रायगढ़ किले पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज की समाधि का परिसर महाराष्ट्र की अस्मिता और इतिहास का केंद्र है, इसलिए इसके विस्तार, भव्यता और संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र के किले केवल प्रदेश की धरोहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक हैं, इसलिए इनके विकास के लिए समग्र ‘हेरिटेज मिशन’ चलाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि वित्त वर्ष 2026–27 में महाराष्ट्र के लिए विशेष पैकेज घोषित किया जाए, आगामी तीन महीनों में सभी धरोहर स्थलों का व्यापक सर्वेक्षण हो, यूनेस्को मानांकित स्थलों पर सुविधाओं को उन्नत करने के लिए बजट उपलब्ध कराया जाए और सभी अवैध अतिक्रमण तत्काल हटाए जाएं।



