भूजल संरक्षण के लिए रेनवॉटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था मजबूत करें
सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा; अनियंत्रित शहरीकरण से जल संकट और बाढ़ की स्थिति बढ़ने की चेतावनी

डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि अनियंत्रित शहरीकरण और तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण के कारण प्राकृतिक जल निकासी मार्ग और खुले भू-भाग समाप्त हो रहे हैं, जिससे जमीन की जल अवशोषण क्षमता घट रही है। परिणामस्वरूप कम समय में होने वाली तेज बारिश सीधे नालों और नदियों में बह जाती है, जिससे शहरी बाढ़ की स्थिति बनती है, जबकि भूजल स्तर में कोई ठोस सुधार नहीं होता। उन्होंने यह भी बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण लंबे समय तक हल्की वर्षा के बजाय अब कम अवधि में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे समस्या और गंभीर होती जा रही है।
इस संदर्भ में उन्होंने मांग की कि सहकारी हाउसिंग सोसायटियों को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड) के तहत वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के लिए पात्र बनाया जाए, ताकि मध्यमवर्गीय और सामान्य नागरिकों को सीधा लाभ मिल सके और सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण को बढ़ावा मिले। साथ ही जिन सोसायटियों में कार्यशील और प्रमाणित रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे हैं, उन्हें संपत्ति कर में छूट, जल शुल्क में रियायत जैसे वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएं, जिससे अन्य सोसायटियां भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित हों।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नए भवन निर्माण, व्यावसायिक परिसरों और बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया जाए तथा इसके लिए डिजिटल ट्रैकिंग, भौतिक सत्यापन और समयबद्ध ऑडिट आधारित सशक्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए। नियमों का पालन न करने वाले बिल्डरों या संस्थाओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और जुर्माने का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्षा जल संचयन को केवल औपचारिक शर्त न मानकर शहरी नियोजन का अभिन्न अंग बनाया जाए, जिससे जल संकट कम होगा और बाढ़ नियंत्रण, ऊर्जा बचत तथा पर्यावरणीय संतुलन में भी मदद मिलेगी।



