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कैंपस से ही राजनीति की नई पीढ़ी तैयार होगी अनुराग सिंह ठाकुर

15वीं भारतीय छात्र संसद का समापन

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पुणे, 23 फरवरी: नीति-निर्माण, प्रशासन और सार्वजनिक सेवा की जटिलताओं को समझने वाले राजनीतिक रूप से सक्षम, प्रशासनिक रूप से दक्ष और सामाजिक रूप से संवेदनशील युवाओं की नई पीढ़ी कैंपस से ही तैयार की जा सकती है। राजनीति को शुद्ध करने के लिए प्रतिभाशाली युवाओं को आगे आकर राजनीति में प्रवेश करना चाहिए। यह आह्वान लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने किया।

वे MIT World Peace University और MIT School of Government द्वारा आयोजित 15वीं भारतीय छात्र संसद के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर पूर्व सांसद व वरिष्ठ पत्रकार Shahid Siddiqui तथा राज्यसभा सांसद Sandeep Kumar Pathak विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष व भारतीय छात्र संसद के संस्थापक डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड, कुलगुरु डॉ. आर.एम. चिटणीस और सीईओ डॉ. प्रसाद खांडेकर भी मंच पर मौजूद थे।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र, नेतृत्व और सार्वजनिक नीति के साथ-साथ एआई नैतिकता को भी समझना आवश्यक है। 21वीं सदी में यदि लक्ष्य “कैंपस से कैबिनेट” तक का है, तो एआई नैतिकता के साथ सामंजस्य जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि मानवीय दृष्टिकोण के साथ तकनीक के उपयोग पर देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने एआई की शक्ति पर शिखर सम्मेलन का आयोजन किया था। पिछले 10 वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव आए हैं—आईआईटी, आईआईएम, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ी है। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सेमीकंडक्टर, हेल्थकेयर सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। विपक्ष को तर्क और तथ्यों के आधार पर राजनीति करनी चाहिए।

वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सिद्दीकी ने कहा कि विश्वगुरु बनने के लिए युवाओं को स्वयं को सशक्त बनाना होगा। तकनीक के युग में केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। युवाओं के आंदोलनों से ही देश में परिवर्तन आया है—जेपी मूवमेंट जैसे आंदोलनों में युवाओं की अहम भूमिका रही है। उन्होंने जाति-पाति से ऊपर उठकर देश के विकास के लिए काम करने और पहले मानसिकता बदलने का आह्वान किया।

राज्यसभा सांसद डॉ. संदीप कुमार पाठक ने कहा कि “कैंपस टू कैबिनेट” को लेकर कई भ्रांतियां हैं। विश्वविद्यालयों में चुनाव और स्वस्थ बहसें जरूरी हैं—यहीं से श्रेष्ठ नेतृत्व उभरता है। मूल्य-आधारित राजनीति से ही देश का भविष्य सुरक्षित और विकासोन्मुख होगा।

डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा कि भ्रष्टाचार, जातिवाद, सांप्रदायिकता और औपनिवेशिक मानसिकता में बदलाव जरूरी है। भारतीय छात्र संसद लोकतंत्र में नेतृत्व के अवसर प्रदान करने वाला मंच है और राजनीति का प्रशिक्षण देने वाली एक अनूठी शैक्षणिक पहल है।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों दीपक कुमार पांडे, पूर्वी गंजीवाले, प्रताप पुंडे, उदय शर्मा और नेहाली चावडीकर ने अपने विचार रखे। कुलगुरु डॉ. आर.एम. चिटणीस ने स्वागत भाषण दिया, जबकि प्रा. डॉ. गौतम बापट ने सूत्रसंचालन किया।

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