‘टू सेंटस’ परिवर्तन का एक गहन चिंतन
महिला दिवस के उपलक्ष्य पर विशेषः लेखिका अलेफिया बगासरावाला

पुणे, दि. ७ मार्च : किसी भी समाज का विकास वहाँ की नारीशक्ति की बेहतर स्थिति पर निर्भर करती है. महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक रुप से सबला होंगी तभी एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान दे पायेंगी. आज की नारी शिक्षा, रक्षा तकनीक और नेतृत्व के क्षेत्र में पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नई ऊंचाईयों को छू रही है, जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी प्रमुख भूमिका का संकेत है. इसी कडी में जूडती है लेखिका अलेफिया बगासरावाला का नाम.
अपने पति के निधन के बाद उसकी यादों में टू सेंटस नामक ऐसी किताब लिख डाली जिसमें उसकी भावनाए और यादों को समेटा है. यह व्यक्तिगत वृत्तांत नहीं है. यह परिवर्तन पर एक गहन चिंतन है कि कैसे एक महिला अपने अतीत को गरिमा के साथ सहना सीखती है, अपने वर्तमान को स्पष्टता के साथ जीती है और अपने पर नए सिरे से नियंत्रण हासिल करते हुए भविष्य में कदम रखती है.
यह एक ऐसी किताब है जो पाठकों को रुकने सोचने और यह समझने के लिए आंमंत्रित करती है कि कभी कभी एक ही जीवन में अनेकों का ज्ञान समाहित होता है.
हर किसी को आत्मा को झंनझोरकर रखनेवाली इस किताब के चलते लेखिका अलेफिया बगासरावाला को हाल ही में महाराष्ट्र राज्य के कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय के मंत्री मंगल प्रभात लोढा और अजिंक्य डी.वाई पाटिल समूह के कुलाधिपती डॉ. अजिंक्य डी.वाई पाटील ने राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया है.
पुणे की लेखिका अलिफिया ने टू सेंट्स नामक पुस्तक लिखी है. एक विधवा के नोट्स जो प्रेम, मानसिक शांति और विधवापन जैसे विषयों पर प्रकाश डालती है. यह किताब
अलेफिया बगासरावाला की यात्रा के परते खोलती है. जिसे परफ्यूम और कविता के जरिए बताया गया है, साथ ही आज भारत में विधवाओं की स्थिति और परिस्थिति के एक जरुरी सोशल मैसेज को भी छुआ गया है.
टू सेंटस एक गहन और शांत रचना है, एक ऐसी कथा जो दर्शाती है कि कैसे एक महिला की जीवन की समझ अलग अलग अध्यायों से गुजरते हुए विकसित होती है. जिनमें प्रत्येक अनुभव, जिम्मेदारी और आंतरिक जागृति से आकार लेता है, किताब का शीर्षक स्वयं एक रुपक है, दोहरी दृष्टिकोणों का, समय के साथ स्मृति और अर्थ में होने वाले परितवर्तनों का और इस बात का कि कैसे जीवन बिना विरोधाभास के अनेक सत्यों को समाहित कर सकता है.
यह संस्मरण कहानी कहने, कविता और प्रतीकात्मक इस्त्र बनाने की विविधों को भावनात्मक उपचार की अभिव्यक्ति के रुप में प्रस्तूत करता है. एक सुगंध की तरह संरचित होती है. एक उपसंहार भी शामिल है जो ऐतिहासिक कालखंडों में भारत में विधवाओं की सामाजिक स्थिति का संक्षिप्त विश्लेषण करता है.
अलेफिया बगासरावाला ने पुस्तक की एक प्रति परोपकारी डॉ. मंजु लोढा को भेट दी. उन्होंने इस पर प्रेरणादायी संदेश को लिखा. साथ ही अजिंक्य डी.वाई.पाटिल समूह के अध्यक्ष ने अपनी शुभकामनाए दी.
अलेफिया बगासरावाला की इस किताब को कई सेलिब्रिटी और इंडस्ट्रियलिस्ट ने भी एंडोर्स किया है. जैसे डॉ. फिरोज पूनावाल, उमेश फेरवानी, ऐमन मेहता, राबिया पटेल, अर्चना जैन, डॉ. मिकी मेहता, रिधिमा तिवारी का समावेश है.
इस सम्मान के बाद अलेफिया बगासरावाला ने कहा कि यह मान्यता उन्हें व्यक्तिगत अनुभवों और समाजिक मुद्दों को दर्शाने वाली कहानियाँ को लिखने और साझा करने के लिए प्रोत्साहित करती है. उनकी पुस्तक टू सेंटस नोट्स ऑफ द यंग विडो यह वर्तमान में बाजार में उपलब्ध

