
पुणे . श्रीराम चरित्र केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन के लिए एक मार्गदर्शक है। भगवान श्रीराम का आदर्श आचरण और श्रीकृष्ण का उपदेश, दोनों ही मानव जीवन को सही दिशा देने वाले हैं। रामायण एक प्रमाणित ग्रंथ है, जो युगों-युगों से समाज को सही राह दिखा रहा है। यह विचार वरिष्ठ प्रवचनकार डॉ. कल्याणी नामजोशी ने व्यक्त किए। श्रीरामनवमी उत्सव के अवसर पर श्री रामजी संस्थान, तुलशीबाग द्वारा आयोजित श्रीमत् रामायण प्रवचन में वे बोल रही थीं। इस आयोजन में संस्थान के कार्यकारी ट्रस्टी भरत तुलशीबागवाले, डॉ. रामचंद्र तुलशीबागवाले, कोटेश्वर तुलशीबागवाले, रामदास तुलशीबागवाले, श्रीपाद तुलशीबागवाले और राघवेंद्र तुलशीबागवाले समेत तुलशीबागवाले परिवार के कई सदस्य उपस्थित थे।
संस्थान द्वारा लगातार 264वें वर्ष श्रीरामनवमी उत्सव
संस्थान द्वारा लगातार 264वें वर्ष श्रीरामनवमी उत्सव मनाया जा रहा है। इस अवसर पर डॉ. नामजोशी ने बताया कि सनातन धर्म अनादि काल से अक्षय रूप में स्थापित है। उन्होंने कहा, “पहले हम स्वयं को केवल ‘हिंदू’ कहते थे, लेकिन अब हमें ‘सनातन हिंदू’ कहना चाहिए, क्योंकि हमारा धर्म वेदों पर आधारित है। श्रीराम का जीवन व्यवहार में उपयोगी और अनुकरणीय है।”
संस्थान के कार्यकारी ट्रस्टी भरत तुलशीबागवाले ने बताया कि उत्सव के तहत विशेष संगीत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएग। इसमें 1 अप्रैल को दीप्ति कुलकर्णी का सोलो हार्मोनियम वादन, 2 अप्रैल को वृषाली मावलंकर का गायन, 4 अप्रैल को सानिया कुलकर्णी की गायन सेवा दिया जाएगा। ये सभी कार्यक्रम रात 8:30 बजे होंगे और निःशुल्क रहेंगे। आयोजकों ने पुणे के श्रद्धालुओं से अनुरोध किया कि वे बड़ी संख्या में इन कार्यक्रमों में भाग लें और उत्सव को सफल बनाए।