ताजा खबरदेश / विदेशब्रेकिंग न्यूज़शहर

बंद गैस पाइपलाइन योजनाओं पर 2014 के बाद की स्थिति स्पष्ट करे केंद्र सरकार  – कांग्रेस की मांग

मोदी सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की अपील

Spread the love

पुणे : यूपीए सरकार (2004–2014) के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में क्रूड ऑयल और विशेष रूप से प्राकृतिक गैस के पाइपलाइन नेटवर्क से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण प्रकल्पों पर चर्चा हुई और कई प्रकल्पों को अमल भी किया गया था। परन्तु  केंद्र सरकार 2014 के बाद देश में बंद गैस पाइपलाइन (अंडरग्राउंड पाइपलाइन) आपूर्ति से जुड़ी योजनाओं की स्थिति स्पष्ट नहीं की है, इसलिए केंद्र सरकार को इस संबंध में श्वेत पत्र जारी करे. यह मांग महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपाल दादा तिवारी ने केंद्र सरकार से की है.

गोपाळदादा तिवारी ने कहा कि उस समय का सबसे चर्चित प्रकल्प Iran–Pakistan–India (IPI) Gas Pipeline था, जिसे “पीस पाइपलाइन” के नाम से भी जाना जाता था। करीब 2700 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के माध्यम से ईरान से पाकिस्तान के रास्ते भारत तक प्राकृतिक गैस लेने की योजना थी, जो दक्षिण एशिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में इस परियोजना और इसी प्रकार की अन्य योजनाओं का क्या हुआ।

तिवारी के अनुसार वर्ष 2005 से 2007 के बीच इस परियोजना को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भी इसे भारत, ईरान और पाकिस्तान की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण बताया था और 2007 में भारत तथा पाकिस्तान ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई थी। हालांकि बाद में अमेरिका के दबाव, ईरान पर लगे प्रतिबंध, परमाणु समझौते की पृष्ठभूमि और अन्य भू-राजनीतिक कारणों के चलते यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।  उन्होंने कहा कि यदि देश की विदेश नीति में निरंतरता बनी रहती तो तेल उत्पादक देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध मजबूत होते और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी दीर्घकालीन योजनाएं साकार हो सकती थीं। इससे संकट की परिस्थितियों में देश अधिक सक्षम तरीके से सामना कर सकता था।

तिवारी ने यूपीए सरकार के दौरान शुरू की गई कुछ प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि नेशनल गैस ग्रिड की अवधारणा 2012 में सामने आई थी। तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने लगभग 30 हजार किलोमीटर लंबा राष्ट्रीय गैस पाइपलाइन नेटवर्क तैयार करने की योजना की घोषणा की थी, जिससे देशभर में प्राकृतिक गैस का वितरण पाइपलाइन के माध्यम से संभव हो सके।

इसी तरह वर्ष 2013 में डाभोल–बेंगलुरु गैस पाइपलाइन का उद्घाटन भी किया गया था। करीब 1000 किलोमीटर लंबी और लगभग 4500 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना महाराष्ट्र से कर्नाटक तक गैस आपूर्ति के लिए महत्त्वपूर्ण मानी गई। इसके अलावा उस समय GAIL और रिलायंस गैस पाइपलाइन जैसे नेटवर्क का भी विस्तार किया गया, जिससे पूर्व और पश्चिम भारत में गैस आपूर्ति को बढ़ावा मिला।

तिवारी ने आरोप लगाया कि इन योजनाओं में आगे और विस्तार तथा सुधार होना अपेक्षित था, लेकिन 2014 के बाद अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए केंद्र सरकार को 2014 के बाद गैस पाइपलाइन और ऊर्जा आपूर्ति परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति पर श्वेत पत्र जारी कर देश को जानकारी देनी चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!