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सुरक्षित यातायात के लिए नियमों का पालन अनिवार्य – पुलिस उपायुक्त डॉ. राजकुमार शिंदे

एमआईटी एडीटी’ विश्वविद्यालय में सड़क सुरक्षा सप्ताह का आयोजन

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पुणे: आत्मअनुशासन से व्यक्तिगत स्वतंत्रता सीमित नहीं होती, बल्कि वह हमारे संरक्षण का माध्यम बनता है। यातायात सुरक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है। वास्तविक शक्ति गति में नहीं, बल्कि नियंत्रण में होती है—इस बात को युवाओं को समझना चाहिए। सुरक्षित यातायात के लिए यातायात नियमों का पालन करना अनिवार्य है, ऐसा प्रतिपादन पुणे परिमंडल-5 के पुलिस उपायुक्त डॉ. राजकुमार शिंदे ने किया।

वे एमआईटी आर्ट, डिजाइन एवं टेक्नोलॉजी (एमआईटी एडीटी) विश्वविद्यालय में पुलिस स्थापना दिवस एवं सड़क सुरक्षा सप्ताह के अवसर पर आयोजित नशामुक्ति एवं यातायात जनजागृति कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय, हडपसर यातायात विभाग तथा लोणी कालभोर पुलिस स्टेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। इस अवसर पर एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय की कार्यकारी संचालक प्रो. डॉ. सुनीता कराड, कुलपति प्रो. डॉ. राजेश एस., हडपसर यातायात विभाग के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजेंद्र करणकोट, लोणी कालभोर पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक राजेंद्र पन्हाले, एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय के प्र-कुलपति डॉ. रामचंद्र पुजेरी, कुलसचिव डॉ. महेश चोपड़े, छात्र कल्याण सहायक संचालक डॉ. प्रतिभा जगताप, अधिष्ठाता डॉ. गणेश पाठक सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

कार्यक्रम में मार्गदर्शन करते हुए कुलपति प्रो. डॉ. राजेश एस. ने विद्यार्थियों से जीवन में ‘360-डिग्री दृष्टिकोण’ अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सर्वांगीण विकास के लिए आत्मअनुशासन पहली आवश्यकता है। साथ ही स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करने और नशामुक्त जीवन के लिए प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत गणमान्य अतिथियों के हस्ते दीप प्रज्वलन से हुई। इसके पश्चात ‘विश्वशांति प्रार्थना’ द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कुलसचिव डॉ. महेश चोपड़े ने अपने प्रास्ताविक में आत्मअनुशासन के महत्व को रेखांकित किया।

पुलिस निरीक्षक राजेंद्र पन्हाले ने यातायात नियमों के पालन पर जोर देते हुए विश्वविद्यालय की अनुशासनप्रिय संस्कृति की सराहना की और कहा कि यह अनुशासन आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित है। यातायात पुलिस निरीक्षक राजेंद्र करणकोट ने सड़क सुरक्षा पर विस्तृत मार्गदर्शन किया। डॉ. प्रतिभा जगताप ने आभार प्रदर्शन किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ में युवाओं की भागीदारी आवश्यक
आंतरिक सुरक्षा के लिए ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ आवश्यक है। पुलिस स्थापना दिवस सप्ताह के दौरान युवाओं को पुलिस से संवाद साधना चाहिए, पुलिस स्टेशन का दौरा कर कार्यप्रणाली को समझना चाहिए तथा यातायात प्रबंधन में स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर पुलिस बल का प्रत्यक्ष अनुभव लेना चाहिए, ऐसा पुलिस उपायुक्त डॉ. राजकुमार शिंदे ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा।

अन्यथा तीसरे गुरु को आना पड़ता है-
विद्यार्थियों के जीवन में विभिन्न स्तरों पर गुरुओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। माता-पिता प्रथम गुरु, जबकि विद्यालय एवं महाविद्यालय के शिक्षक द्वितीय गुरु होते हैं। लेकिन यदि किसी का आचरण खराब हो और वह पहले दो गुरुओं के नियंत्रण से बाहर चला जाए, तो तीसरे गुरु अर्थात पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ता है। ऐसे गुरु के सान्निध्य में आने पर कोई भी शिष्य अवश्य सुधरता है, यह टिप्पणी करते ही डॉ. शिंदे की बात पर उपस्थित जनसमूह में जोरदार ठहाके गूंज उठे।

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