पुणे

  • रेलवे सुरक्षा होगी अब ‘स्मार्ट’!

    पुणे। रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए पुणे रेल मंडल के इलेक्ट्रिक इंजनों में अब आर्टिफिशियल…

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  • पुणे में गे डेटिंग ऐप पर हुई पहचान बनी ब्लैकमेलिंग की वजह,

      पुणे। शहर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ गे डेटिंग ऐप ‘ग्रिंडर’ के माध्यम से दो…

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  • चॉकलेट के डब्बों में छिपाए थे सांप, तोते और खरगोश;

    पुणे। पुणे के लोहगांव अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए वन्यजीव तस्करी का…

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  • वारजे इलाके में डकैती की तैयारी कर रहे चोर को ‘सिने स्टाइल’ ने पकड़ा, दो फरार

    पुणे : वारजे पुलिस ने वारजे इलाके में डकैती की तैयारी कर रहे एक कुख्यात गिरोह के आरोपी सोनू कपूर…

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  • देश व राज्य में ई-नोटरी प्रणाली लागू करने की भाजपा व्यापारी आघाडी की मांग

      पुणे । देश और महाराष्ट्र राज्य में नोटरी प्रक्रिया के डिजिटलीकरण तथा ई-नोटरी प्रणाली को लागू करने की मांग…

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  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र की विकास की यशस्वी यात्रा: आर्थिक प्रगति, सहकारिता और सामाजिक न्याय में राज्य सबसे आगे – विधान परिषद में विधायक अमित गोरखे का वक्तव्य

      पुणे। महाराष्ट्र विधानपरिषद में बोलते हुए विधायक अमित गोरखे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य सरकार की…

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  • बुधवार पेठ गए लोगो का पीछकर पैसे ऐंठने की घटना

    पुणे: वेश्यावृत्ति के कारण हमेशा चर्चा में रहने वाले बुधवार पेठ से  एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पुणे…

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  • औंध में ब्रेमेन चौक के पास करंट लगने से दो युवकों की मौत

    पुणे। औंध के ब्रेमेन चौक के पास बिजली की डीपी (डिस्ट्रीब्यूशन पैनल) से करंट लगने के कारण दो युवकों की…

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  • 4 से 6 साल के बच्चों को स्कूल में प्रवेश से पहले

    पुणे,  : जैसे-जैसे भारत बाल टीकाकरण में प्रगति कर रहा है, विशेषज्ञ माता-पिता और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से आग्रह कर रहे हैं कि वे बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण चरण—स्कूल प्रवेश की उम्र में डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टूसिस और पोलियो की बूस्टर डोज़—को नजरअंदाज न करें। शैशवावस्था में किया गया प्राथमिक टीकाकरण प्रारंभिक सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण दर्शाते हैं कि डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टूसिस और पोलियो के खिलाफ प्रतिरक्षा समय के साथ कम हो जाती है। यदि बच्चों को समय पर बूस्टर डोज़ नहीं दी जाती, तो स्कूल जाने और अधिक लोगों के संपर्क में आने के दौरान उन्हें गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है।  भारतीय राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (एनआईपी) 6, 10 और 14 सप्ताह की उम्र में डीटीपी वैक्सीन की खुराक की सिफारिश करता है, इसके बाद 16–24 माह में एक बूस्टर डोज़ दी जाती है, और पोलियो की दो अंशीय खुराक 6 और 14 सप्ताह की उम्र में दी जाती हैं। लेकिन जब बच्चा 4–6 वर्ष की आयु तक पहुंचता है, तो उसकी सुरक्षात्मक एंटीबॉडी का स्तर घटने लगता है, जिससे वह संक्रमण और संभावित प्रकोप के प्रति संवेदनशील हो जाता है। डॉ. अमित निगड़े, सलाहकार नियोनेटोलॉजिस्ट एवं पीडियाट्रिशन, क्लाउड नाइन हॉस्पिटल, ने कहा की, स्कूल में प्रवेश केवल बच्चे की शिक्षा में ही नहीं, बल्कि उसके स्वास्थ्य सफर में भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इस उम्र तक आते–आते प्रारंभिक टीकों द्वारा दी गई सुरक्षा कमजोर पड़ने लगती है, ठीक उसी समय जब बच्चे समूह में अधिक समय बिताने लगते हैं। 4 से 6 वर्ष की उम्र के बीच डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टूसिस और पोलियो की अनुशंसित बूस्टर डोज़ देना यह सुनिश्चित करता है कि प्रतिरक्षा समय पर दोबारा सक्रिय हो सके और इस नए जीवन चरण में भी निरंतर सुरक्षा मिलती रहे।  ”भारतीय बाल रोग अकादमी (आईएपी) आधुनिक संयोजन वैक्सीन के उपयोग की सिफारिश करती है, जो एक ही खुराक में कई संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करती हैं। ये विशेष रूप से स्कूल के वर्षों के दौरान उपयोगी हैं, जब संक्रमण का खतरा अधिक होता है, और ये भारत को पोलियो मुक्त बनाए रखने जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धियों को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। “समय पर बूस्टर टीकाकरण बच्चे और पूरे स्कूल समुदाय के स्वास्थ्य की…

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  • कांग्रेस की मांग : अक्कलकोट घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस दें गृहमंत्री पद से इस्तीफा

    पुणे । छत्रपती शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज, शाहू, फुले, आंबेडकर जैसे पुरोगामी विचारों पर चलने वाले और बहुजन-पिछड़े समाज के…

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